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महाराष्ट्राची लोकसंख्या 2011

महाराष्ट्राची लोकसंख्या 2011, ये बोल कर वो फिर सिसकने लगी. मैं भला उसका रोना कैसे देख सकता था. वो मेरी जान थी. मुझे अपने हज़ार आँसू बर्दाश्त थे, पर कीर्ति का एक आँसू भी मैं सह नही सकता था. मैने उस से कहा. छोटी माँ बोली मैं कभी तेरी नज़रों से दूर नही रही हूँ. इसलिए मुझे सामने ना पाकर तुझे ऐसा लग रहा है. मुझे भी कल रात से तेरे बिना बहुत बेचैनी और घबराहट सी हो रही है. आज तेरा जनम दिन है और हम साथ नही है. शायद इसी वजह से हम दोनो को ऐसा लग रहा है.

कीर्ति बोली जान क्या तुम थोड़ी देर चुप होकर मेरी बात नही सुन सकते. मैं एक एक करके सब बात बता रही हूँ ना. मौसी पूछती है क्या हुआ बहूरानी. इसमे ऐसा क्या लिखा है. जिसको पढ़कर आप रोने लगी और ये सब किसके लिए है.

मैं बोला नही आंटी ऐसी कोई बात नही है. डिन्नर अच्छा है. मैं तो ये देख रहा हूँ कि, आपके अंदर सब के लिए कितनी ममता है. आप हम सब का कितना ख़याल रखती है. इतना सब करने के बाद भी आपके चेहरे पर थकान का नामो निशान तक नही है. महाराष्ट्राची लोकसंख्या 2011 निक्की बोली वो तो मैं आपको देख कर ही समझ गयी थी. लेकिन आप को ये नही लगता कि आप वेवजह मुझसे नाराज़गी जता रहे थे.

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  1. मैं बोला कोई कह देने बस से तो दोस्त हो नही जाता. आपने मेरा हर समय साथ दिया है. यही तो एक सच्चे दोस्त होने की निशानी है.
  2. क्योकि यदि कीर्ति मेरी जान थी तो, अमि निमी मुझे जान से प्यारी थी. मेरे लिए अमि निमी और कीर्ति मे से, किसी एक का साथ छोड़ पाना या किसी एक का साथ दे पाना बहुत मुस्किल था. मैं एक अजीब सी कशमकश मे घिर गया था. गूगल का फाउंडर कौन है
  3. मैं कीर्ति के सवालों से परेशान था. लेकिन उसके सवालों का जबाब देना भी ज़रूरी था. वरना वो मेरा पिछा छोड़ने वालों मे से नही थी. इसलिए मैंने अपने आपको बचाने की कोशिस करते हुए कहा. अमि बोली रुकिये भैया. आपने निमी का गिफ्ट तो ले लिया. लेकिन मेरा गिफ्ट तो लिया ही नही है. अब आप ये पर्स नही रखेगे. अब आप मेरा दिया हुआ पर्स रखेगे.
  4. महाराष्ट्राची लोकसंख्या 2011...मैं इस बात से भी अंजान नही था की, उसके मन मे अभी क्या चल रहा है. वो मन ही मन इस सब के लिए खुद को दोषी मान रही थी. जबकि मैं कीर्ति के इस प्यार को देख कर, मन ही मन अपनी किस्मत पर नाज़ कर रहा था. मैं इस बात से भी अंजान नही था की, उसके मन मे अभी क्या चल रहा है. वो मन ही मन इस सब के लिए खुद को दोषी मान रही थी. जबकि मैं कीर्ति के इस प्यार को देख कर, मन ही मन अपनी किस्मत पर नाज़ कर रहा था.
  5. प्रिया की ये बात मानने मे मुझे कोई परेसानी नही थी. लेकिन अब मैं उसकी ये बात मान कर उसके प्यार को और गहरा करना नही चाहता था. इसलिए मैने प्रिया का दिल तोड़ते हुए कहा. कीर्ति का ये इल्ज़ाम सुनते ही, मेरा सर तनाव से फटने लगा. मेरे लिए उसका ये इल्जन सहना असहनीय हो गया था. तब मुझे अपनी खामोशी को तोड़ना ही पड़ा. मैने अपनी खामोशी को तोड़ते हुए, उस से कहा.

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मेरी उत्तेजना चरम पर थी और मैं एक ऐसे दोराहे पर खड़ा था. जहाँ पर यदि मैं प्रिया का साथ देता तो, कीर्ति का प्यार और विस्वास चकनाचूर होना था. या फिर प्रिया का साथ ना देने पर भोले मन को चोट पहुचाना था. मैं कुछ भी फ़ैसला नही कर पा रहा था.

तभी मुझे ऐसा लगा, जैसे कोई मेरे पिछे खड़ा हो. मुझे इस बात का अहसास होना था कि, मेरे मन मे एक सवाल उठ गया. कहीं मेरे पिछे दादा जी, प्रिया, निक्की मे से कोई, या फिर तीनो ही तो नही खड़े है. यदि जैसा मैं सोच रहा हूँ. वैसा ही है, तो क्या उन्हो ने मेरे और छोटी माँ के बीच चल रही, सारी बातें सुन ली. फिर मैने आंटी और मेहुल को बाइ बोला और घर के लिए निकल पड़ा मगर अब मेरे मान से बोर्डिंग जाने का दर निकल गया था. आंटी ने मेरे दिमाग़ मे नयी मा की जो तस्वीर बनाई थी, वो मुझे अची लगने लगी थी. मई बस इसी बारे मे सोचते सोचते अपने घर की तरफ चला जा रहा था.

महाराष्ट्राची लोकसंख्या 2011,मैं बोला देख मुझे बहलाने की कोसिस करना बेकार है. मैं जानता हूँ, तुझे ये सब सुनकर बहुत बुरा लगा है. मुझे भी तुझसे ये सब बातें करना ज़रा भी अच्छा नही लगा. लेकिन मेरे लिए तुझसे, ये सब बातें करना ज़रूरी था. तू साफ साफ क्यों नही कहती कि, तुझे रिया के साथ मेरा ये सब करना बुरा लगा है.

मेरा मन तो कर रहा था जैसे ही गौरी जल्दी से थोड़ी ऊपर उठे मैं अपने पप्पू को उसकी गांड के गुलाबी छेद के ठीक नीचे लगा दूं। और जैसे ही वह नीचे आये मेरा पप्पू एक ही झटके में अन्दर चला जाए। पर अभी जल्दबाजी में ऐसा नहीं किया जा सकता था।

वहाँ पहुच कर हम लोग झरने के पास जाकर बैठ गये. कुछ देर तक हमारी यहाँ वहाँ की बातें होती रही. मैने कीर्ति से कहा.செக்ஸி ப்ளூ ஃபிலிம் செக்ஸி

अब मैं बुरी तरह से उलझ कर रह गया था. एक तरफ तो प्रिया का अचानक इस तरह से, मुझे प्यार करने लगना, मुझे उसका आकर्षण लग रहा था. वही दूसरी तरफ उसकी मेरे लिए समर्पण की भावना मे, मुझे उसका भोलापन और प्यार नज़र आ रहा था. लेकिन अगले दिन आकाश की कोई बिज़्नेस मीटिंग थी. जिसकी वजह से उसने मुझसे कहा कि, आप और पद्मिशनी वहाँ पहुच कर डॉक्टर से मिल कर, उन्हे पिच्छली रिपोर्ट दिखाइए. दूसरे दिन मैं भी पहुच जाउन्गा.

मैं बड़े गौर से निक्की के चेहरे के बदलते हुए भाव को देख रहा था और मुस्कुरा रहा था. लेकिन अचानक ही तभी कुछ ऐसा हो गया कि, मेरे चेहरे की मुस्कुराहट कही गायब हो गयी और निक्की मुझे देख कर मुस्कुराने लगी.

मेरी नज़र उसके सीने से होते हुए उसकी जांघों पर गयी. शॉर्ट नाइटी मे से बाहर निकली, उसकी जाँघो ने मेरी उत्तेजना को और भी बढ़ा दिया. अब मेरा खुद पर से काबू खो चुका था और मैं पायजामे के उपर से ही अपने लिंग को मसलने लगा.,महाराष्ट्राची लोकसंख्या 2011 मैं बोला चल ठीक है. तू ज़रा रुक, मैं बाहर से पानी लेकर आता हूँ. आज जल्दी जल्दी मे मैं पानी लेना ही भूल गया.

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