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उस्मानाबाद हवामान अंदाज

उस्मानाबाद हवामान अंदाज, ओह्ह्ह्ह माई स्वीट मॉम। आई लव यू। मुझे बांहों में भर कर चूम लिया। मैं भीतर तक गनगना उठी उसकी इस हरकत पर। आखिर अब वह बच्चा तो रहा नहीं। पूरा मर्द बन चुका था। मुझे उसकी बांहों में अपने बेटे के स्थान पर एक मर्द की बांहों का आहसास हुआ। मोना चौधरी के होंठों से चीख निकली। | अगली बार मखानी ने एक साथ दो बार उसका सिर, दरवाजे से टकराया। बेदम होती मोना चौधरी उसी पल बेहोश होकर नीचे गिरती चली गई। कमला रानी ने उसके सिर के बाल छोड़ दिए थे।

प्रवींद्र कमरे से निकलने लगा तो नेहा उसके पीछे तेज कदमों से गई और पीछे से प्रवींद्र का हाथ जोर से पकड़कर कर कहा- प्लीज मत जाओ, प्लीज... क्या यह मेरा कसूर है की तुम मुझे अब छोड़कर जाओ? हालात ऐसे हो गये थे की मुझे वो सब करना पड़ा अब तो समझो तुम... नेहा दौड़ती हई उस वार्ड में गई जहाँ प्रवींद्र शिफ्ट हआ था। दोनों एक दूसरे को बाहों में थामे रोने लगे। प्रवींद्र को भी रवींद्र की मौत की खबर मिल गई थी।

ये कैसे हो सकता है। । ये हो रहा है उल्लू के पट्टे। सपन चड्ढा ने हड़बड़ाकर जेब में हाथ डाला और पत्थर निकाला-देख...गर्म है ये। । ओह...सच में । लक्ष्मण दास ने पत्थर को हाथ लगाते ही कहा।। उस्मानाबाद हवामान अंदाज अच्छा नहीं लग रहा है? मैं उसकी कान में फुसफुसाया। वह बोला कुछ नहीं लेकिन सिर्फ सिर हिला कर जता दिया कि उसे अच्छा लग रहा है। फिर वह धीरे से दाहिना हाथ पीछे ले कर धोती के ऊपर से ही मेरा लौड़ा सहलाने लगा। मैं समझ गया कि अशोक को यह सब पसंद आ रहा है।

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  1. रामू अब अपने होंठों को चुसवाने का भरपूर मजा ले रहा था। उसने तो जादू कर दिया था रूबी पे। ऊपर से रूबी होंठों का रस पी रही थी, तो नीचे रामू के हाथ उसके चूतरों पे घूम रहे थे। तभी घर के दरवाजे के खुलने की आवाज आती है। राम रूबी को एक झटके से अपने से अलग करता है।
  2. प्रवींद्र ने दोबारा कहा- भाभी, मुझे माफ करना प्लीज... मैं अपने आपको संभाल नहीं पाया और आपको खुश नहीं कर पाया, केवल खुद को खुश किया, मगर आप प्यासी रह गई, वेरी सारी भाभी। आपके अंदर डालने से पहले ही मैं झड़ गया... उसको क्या पता था कि नेहा कितनी बार झड़ चुकी है पिछले घंटों में। डी वरून मुलींची नावे
  3. रानी साहिबा का कहा सुन रखा है मैंने कि दो लोग आएंगे बाहरी दुनिया से। उनमें से एक धुआं उड़ाने वाला होगा। धुआं उड़ाने वाला ही रानी साहिबा को कालचक्र से मुक्ति दिलाएगा। सरदार बोला।। ये है सामने नील सिंह यानी कि आज के महाजन का घर । मखानी के कानों में शौहरी की फुसफुसाहट पड़ी—परंतु यहां पर तुझे जगमोहन के रूप में जाना है।
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  5. हो। जगमोहन की निगाह नानिया के हाथ में फंसी मोटी-सी अंगूठी पर जा टिकी—किताब पढ़ी। सारी पढ़ ली। रास्ता हमें मिल जाएगा, परंतु पहले जो बाहर निकलेगा, वो जान गंवा बैठेगा। और अपने होंठों को दाँतों में दबाते हए ऊपर प्रवींद्र के चेहरे में देखा। प्रवींद्र से सहन नहीं हआ और झट से उसने नेहा का सर पकड़कर सख्ती से लण्ड को उसके मुंह तक किया।

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नहीं, कोई समस्या नहीं है। आज मेरे बेटे क्षितिज को वापस जाना था, उसी की तैयारी में व्यस्त थी। कैसे बताती उसे कि क्षितिज की पाशविक कामपिपाशा को झेलती रही रात भर।

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जब नहाने के बाद नेहा ने कमरे में अंदर दाखिल होने के लिए अपने कमरे का दरवाजा खोला तो वो अपने पिता के साथ अपने भाई अनिल की पत्नी आरती को बिस्तर पर पायी।

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